'डियाना' (प्रवासी कहानी ) डॉ.सुनील जाधव
भाग - १
“येरकीन, कयिर्ली टैन
(सुप्रभात)!
तुम अपने नाम की तरह ही शांत स्वभाव के हो। उस दिन जब हम कॉलेज
टूर से शिमबुलक की बर्फीली पहाड़ी पर थे;
हमने आइस स्केटिंग, स्कीइंग और स्नोबोर्डिंग
की। बर्फ में जब मैं खुशी और मस्ती के साथ पहाड़ी पर चढ़ तो गई थी, पर वापस लौटते समय मेरी हिम्मत नहीं हो रही थी। तुमने मेरा हौसला बढ़ाया।
जब मेरा पैर फिसल गया, तो तुमने मुझे संभाल लिया। मुझे ठंड
से ठिठुरता देख तुमने अपनी परवाह किए बिना अपना स्वेटर मुझे पहना दिया और स्वयं
ठंड में ठिठुरते रहे। येरकीन, मेरे प्रिय मित्र! उस दिन मेरे
दिल से एक आवाज़ आई कि डियाना येरकीन से प्यार करती है। आज कॉलेज का आखिरी दिन है।
हम अब एक महीने के बाद मिलेंगे। मुझे अपने जीवन में तुम्हारे जैसे ही साथी की तलाश
थी। मैं तुमसे प्यार करती हूँ, येरकीन! तुम्हारे जवाब का
मुझे इंतज़ार रहेगा।
तुम्हारी,
डियाना”
उस दिन डियाना ने कॉलेज की कक्षा छूटते ही अपने प्रिय मित्र
येरकीन को हिम्मत करके अपने जीवन का पहला प्रेम-पत्र थमा दिया और जाते हुए कहा, “इसे घर जाकर पढ़ना। मैं चलती हूँ।”
डियाना आज से पहले कभी इतना नहीं शरमाई थी। शर्म से उसके गाल
अल्माटी सेब जैसे लाल हो गए थे। येरकीन ने अपनी बेस्ट फ्रेंड को इस तरह शरमाते हुए
पहली बार देखा था। डियाना ने कहा था— "घर जाकर पढ़ना", इसीलिए उसने पत्र को वहीं पढ़ने की बजाय अपनी
जेब में रख लिया।
कज़ाकिस्तान में सेबों के शहर के रूप में जिस शहर को पुकारा
जाता है, वह है—अल्माटी। कहा
जाता है कि विश्व में यदि खाने लायक सेबों की शुरुआत कहीं हुई, तो वह इसी शहर में हुई। सुंदर, बर्फ से ढके पहाड़ों
से सटे इस शहर में अक्सर शीतल और मन को मोह लेने वाली हवा चलती है, जहाँ सुंदर कज़ाक़ लोग अपने कार्यों में व्यस्त रहते हैं। इसी शहर में
डियाना अपने माता-पिता, तीन भाइयों और तीन बहनों वाले बड़े
परिवार के साथ रहती थी। डियाना अपने इस परिवार से मिलने वाले प्रेम के कारण स्वयं
को बहुत सौभाग्यशाली मानती थी। यह प्रेम की भावना उसके माता-पिता से ही उसमें आई
थी। दोनों ने अपने परिवार के विरोध में जाकर प्रेम-विवाह किया था। पिता श्यमकेंट
से थे, तो माँ किजिलोर्दा से; पर दोनों
अल्माटी की गलियों में ही पले-बढ़े थे। एक बार जब डियाना ने अपनी माँ से उनकी
प्रेम-कहानी सुनाने के लिए कहा, तो माँ ने हँसते हुए अपनी
बेटी से कहा था:
“बेटा डियाना, हम बचपन से
एक साथ एक ही शहर में पले-बढ़े थे। जब हम जवान हुए और हमने महसूस किया कि हम
एक-दूसरे के बिना नहीं रह सकते, तब हमने अपने माता-पिता को
सूचित किया। मेरी माँ को लड़का तो पसंद था, किन्तु वह अभी
कोई काम नहीं करता था, इसीलिए उन्होंने इस रिश्ते से मना कर
दिया। किन्तु प्रेम कहाँ किसी की बात सुनता है! एक दिन हम दोनों ने फैसला किया कि
हम अल्माटी से कहीं दूर एक अलग दुनिया में जाएँगे, जहाँ हमें
ढूँढने कोई न आ सके। हमने अल्माटी जैसे ठंडे स्थान के विपरीत एक गर्म स्थान पर
जाना, यानी चारीन कैन्यन जाना चुना। चारीन कैन्यन एक
प्राकृतिक चमत्कार है, जिसे 'मिनी
ग्रैंड कैन्यन' भी कहा जाता है। यहाँ हवा और पानी ने लाल
बलुआ पत्थर को तराशकर अद्भुत आकृतियों को जन्म दिया है, जिससे
एक अलग ही दुनिया में होने का अहसास होता है। जब मैंने उसे पहली बार देखा, तो लगा कि हम सच में ही किसी अलग दुनिया में पहुँच गए हैं। वहीं हमने
विवाह कर लिया और वहाँ से दूर, शहर से अलग, खूबसूरत पर्वतीय झील 'बिग अल्माटी लेक' (जिसका रंग मौसम और दिन के समय के साथ बदलता है) के किनारे बसे एक होटल में
अपने जीवन की पहली रात बिताई थी।” और वह खुद ही अपने दोनों हाथों से चेहरा छिपाकर
शर्मा गई थी।
माँ ने डियाना को अपनी प्रेम-कहानी सुनाते हुए उसके बदलते, मुस्कुराते और गुलाबी होते गालों को देखा और
पूछा, “डियाना, क्या तेरी जिंदगी में
कोई आया है, जिसे तू पसंद करती है? मैं
इसीलिए पूछ रही हूँ क्योंकि जब मेरी जिंदगी में मैंने तेरे पिता के प्रेम को महसूस
किया था, तब मेरे गाल भी ऐसे ही गुलाबी हो गए थे।”
माँ डियाना की सहेली के समान थी,
इसीलिए डियाना ने जब येरकीन के बारे में बताया, तो माँ ने उसे खाने पर आमंत्रित करने के लिए कहा। डियाना ने खुशी से हामी
भरी। माँ ने पिता को बताया; पिता को भी इससे कोई आपत्ति नहीं
थी।
अब एक महीने बाद कॉलेज खुलने वाला था। कॉलेज का पहला दिन था।
डियाना को येरकीन के पत्र के उत्तर का इंतज़ार था। उसने पूरे एक महीने इसका
इंतज़ार किया था। उसे यकीन था कि येरकीन इस पत्र को पढ़कर खुशी से झूम उठेगा।
डियाना को कॉलेज के कई लड़के चाहते थे,
किन्तु डियाना येरकीन के सिवा किसी को भाव नहीं देती थी। उसे लगा था
कि येरकीन पत्र पढ़ते ही तुरंत दौड़ता हुआ उसके पास आ जाएगा। पर उसने अपने आप को
समझाया, 'शायद उसने वह पत्र अभी पढ़ा नहीं होगा या गाँव गया
होगा। वह भी कॉलेज शुरू होने का इंतज़ार कर रहा होगा, ताकि
मुझे सरप्राइज दे सके।' उसके मन-मस्तिष्क में ठंडी लहर की
तरह कई विचार अटकेलियाँ कर रहे थे। वह एक महीने से आज के दिन का ही इंतज़ार कर रही
थी। डियाना ने अपने माँ और पिता से कहा कि आज वह उसे भोजन के लिए घर लेकर आएगी।
सुबह से ही कज़ाक़ पकवानों को स्वयं डियाना, उसकी माँ और बहनें सब मिलकर बना रही थीं। वे
सब खुश थीं कि डियाना के जीवन में अब नया मोड़ आने वाला है। वे सभी भविष्य के
सुनहरे सपनों को बुन रहे थे। माँ ने तो कल्पना भी कर ली थी कि येरकीन और डियाना की
शादी हो गई है और वे अपने ससुराल खुशी-खुशी जा रहे हैं। येरकीन के लिए बेशबरमाक
(कज़ाकिस्तान का राष्ट्रीय व्यंजन, जिसमें उबला हुआ मांस और
नूडल्स होते हैं), मंटी (कद्दू या मांस से भरे पकौड़े),
काज़ी (घोड़े के मांस से बनी एक पारंपरिक सॉसेज) और कुमीस (किण्वित
घोड़ी के दूध से बना एक पारंपरिक पेय) बनाए गए थे। अब बस येरकीन का इंतज़ार था।
डियाना ने उस दिन कॉलेज का यूनिफॉर्म पहनने की बजाए पारंपरिक
कज़ाक़ पोशाक पहनना पसंद किया था। उस दिन वह खुशी के सातवें आसमान पर बादलों के
घोड़ों पर सवार राजकुमारी-सी लग रही थी। उसने अपना स्कूटर स्टार्ट किया और कॉलेज
की ओर निकल पड़ी। रास्ते में हर लड़का उसे येरकीन की तरह ही दिखाई दे रहा था। वह
थोड़ी देर रुकती और महसूस करती कि यह तो उसका भ्रम है; फिर अपने हाथ से सिर के पीछे थपकी देती और
शर्मा जाती। उसने महसूस किया कि वह पूरी तरह से येरकीन के प्यार में पड़ चुकी है।
देखते ही देखते सामने कॉलेज दिखने लगा था। वह गेट के पास आई और
अंदर प्रवेश किया। स्कूटर स्टैंड पर उसने अपनी स्कूटर खड़ी कर दी। उसके कॉलेज में
प्रवेश करते ही जिन-जिन लड़कों की उस पर नज़र पड़ती,
वे देखते ही रह जाते। मानो डियाना के कॉलेज में आने से उन सबके हृदय
प्यार में घायल हो गए हों! हर कोई महसूस करता कि डियाना एक नज़र मेरी ओर देख ले तो
बात बन जाए। गलती से जिस पर डियाना की नज़र पड़ जाती, वह
खुशी से झूम उठता था।
पर डियाना की आँखें तो बस येरकीन को ढूँढ रही थीं। उसने कॉलेज
परिसर में उसे ढूँढा, वह कक्षा में गई;
उसकी नज़रें कक्षा की हर बेंच पर दौड़ रही थीं। येरकीन जहाँ बैठता
था, उस दिन वहाँ कोई और लड़का बैठा हुआ था। “यहाँ से उठो!
कहीं और जाकर बैठो। यह जगह येरकीन की है,” डियाना ने उस
लड़के से वहाँ से उठने के लिए कहा।
कक्षा अब समाप्त हो चुकी थी,
पर येरकीन का कोई अता-पता नहीं था। उसने पूछताछ की, पर किसी को येरकीन के बारे में कोई जानकारी नहीं थी। जिस खुशी से वह उस
दिन येरकीन से मिलने आई थी, चेहरे की वह खुशी अब उदासी में
बदलती जा रही थी। उसकी मुस्कुराती आँखें अब ऊपर से शांत, लेकिन
भीतर से खारे पानी का समंदर बन चुकी थीं। वह अब अपने घर की ओर चलने को हुई,
तभी देखा कि येरकीन सामने से आ रहा है। उसकी खुशी का कोई ठिकाना न
रहा, वह उछल पड़ी। वह दौड़कर उसकी बाँहों में सिमट जाना
चाहती थी, पर येरकीन ने उसे निराश किया था; इसलिए अब वह उससे झूठ-मूठ रूठ गई थी। वह चाहती थी कि येरकीन उसे देखे और
खुद आकर अपने प्रेम का इज़हार करे। येरकीन जैसे-जैसे करीब आ रहा था, उसके दिल की धड़कन और तेज़ होती जा रही थी। जैसे ही उसने महसूस किया कि वह
करीब आ चुका है, उसने अपनी आँखें मूंद लीं। पर जब उसने कुछ
क्षण बाद अपनी मुँदी आँखें खोलीं, तो देखा कि येरकीन उसे
नज़रअंदाज़ करके आगे बढ़ चुका है और किसी अन्य लड़की के साथ हँस-हँसकर बात कर रहा
है। खुशी से उदासी, फिर उदासी से गुस्सा—डियाना की भावनाएँ
तेज़ी से बदल रही थीं।
वह अब तक सातवें आसमान पर बादलों के घोड़े पर राजकुमारी की तरह
सवार थी, किन्तु अब वह अचानक
ज़मीन पर धड़ाम से आ गिरी थी। इस चोट से वह घायल तो हुई, पर
चीख भी नहीं पाई। वह उठी, सीधे अपनी स्कूटर पर सवार हुई और
कॉलेज के गेट के बाहर चली गई। उसने महसूस किया कि वह कॉलेज के लड़कों के दिलों की
धड़कन है, हर लड़का उसका प्यार पाना चाहता है, किन्तु येरकीन...
वह सोच-सोचकर पागल हुई जा रही थी। उस वक्त उसमें घर जाने की
हिम्मत नहीं थी। घर पर सभी येरकीन के आतिथ्य के लिए पलक-पावड़े बिछाए, भविष्य के सपने सजाए इंतज़ार में खड़े थे। वह
सीधे घर जाने के बजाए गोर्की सेंट्रल पार्क में जाकर एक बेंच पर घंटों बैठी रही।
जब शाम रात में बदल गई, तब उसे लगा कि अब उसे घर लौट जाना
चाहिए; घर पर सभी चिंतित होंगे। वह बाहर से उदास थी, लेकिन उसने अपने आप को संभाला और चेहरे पर एक झूठी मुस्कान लिए घर पहुँची।
घरवालों ने डियाना से कोई सवाल नहीं पूछा, रोज़ की तरह
मुस्कुराकर उसका स्वागत किया—मानो वे सब डियाना के दर्द को पहले से ही जानते हों।
भाग - २
अगले ही दिन, डियाना ने अपने माता-पिता को बताया कि उसने मॉस्को में आगे की पढ़ाई करने
का फैसला कर लिया है। येरकीन के लिए वह जो सुनहरे सपने बुन रही थी, वे अब राख हो चुके थे; अब वह केवल अपने भविष्य पर
ध्यान केंद्रित करना चाहती थी।
डियाना के मॉस्को जाने के कुछ ही हफ्तों बाद, येरकीन को अपनी गलती का अहसास हुआ। कॉलेज में
डियाना की खाली सीट, उसकी अनुपस्थिति और दोस्तों के सवालिया
नज़रिया उसे बेचैन करने लगे। उसे उस दिन का पूरा मंज़र याद आया जब उसने डियाना को
नज़रअंदाज़ किया था। वह दूसरी लड़की बस एक पुरानी परिचित थी जिसके साथ वह हँस रहा
था, लेकिन डियाना के प्रेम-पत्र की गंभीरता का अहसास उसे तब
तक नहीं हुआ था, जब तक कि डियाना चली नहीं गई।
येरकीन ने डियाना को वीडियो कॉल करना शुरू किया। शुरुआती कॉल्स
में उसने अनगिनत बार माफ़ी माँगी और अपने अजीब व्यवहार के लिए पछतावा जताया।
डियाना ने ठंडे दिमाग से उसकी बातें सुनीं। एक महीने तक यह सिलसिला चलता रहा।
"मुझे माफ़ कर दो डियाना! मैं कितना मूर्ख
था। क्या तुम मुझे एक और मौका दे सकती हो?" येरकीन ने
एक शाम भावुक होकर पूछा।
डियाना मॉस्को की ठंड में अपनी बालकनी में खड़ी थी। उसने आसमान
को देखा और गहरी साँस ली। "येरकीन,"
उसकी आवाज़ शांत थी, "मैंने तुम्हारी बात
सुन ली। पर अब सब कुछ बदल गया है। हम कॉलेज के उस दौर से आगे बढ़ चुके हैं। तुम
अपनी ज़िंदगी में खुश रहो।"
"लेकिन..."
"कोई लेकिन नहीं," डियाना ने बीच में टोकते हुए कहा। "जब मैंने तुमसे प्रेम किया था,
तब मैंने तुम्हें बिना शर्त स्वीकारा था। पर तुमने मुझे उस पल में
अस्वीकार किया जब मुझे सबसे ज़्यादा संबल की ज़रूरत थी। मैं तुम्हें अब और दोष
नहीं देती, लेकिन मेरा दिल अब वहाँ नहीं है। मैं आगे बढ़
चुकी हूँ और अब मैं अपनी पढ़ाई और करियर पर ध्यान देना चाहती हूँ।"
डियाना ने कॉल काट दिया और अपना सिम कार्ड बदल लिया। येरकीन का
अध्याय अब समाप्त हो चुका था।
भाग - ३
डियाना ने अपना सारा ध्यान अपनी पढ़ाई में लगा दिया। मॉस्को
में उत्कृष्ट प्रदर्शन के बाद, उसने एक नई संस्कृति और भाषा सीखने के लिए बीजिंग में उच्च अध्ययन के लिए
आवेदन किया और उसमें सफल रही।
बीजिंग में पढ़ाई पूरी करते ही उसे एक बड़ी मल्टीनेशनल कंपनी
में आकर्षक कॉर्पोरेट नौकरी का प्रस्ताव मिला। यह एक आरामदायक और सुनिश्चित जीवन
का वादा था, लेकिन डियाना को लगा
कि वह फिर से अपने लिए एक 'शांत' और
बँधा-बँधा जीवन चुन रही है—वैसा जीवन जैसा वह कभी येरकीन के साथ जीने की कल्पना
किया करती थी।
उसे अपने माता-पिता की प्रेम-कहानी याद आई, जिन्होंने अपने लिए एक अलग दुनिया—चारीन
कैन्यन—चुनी थी। उसने महसूस किया कि वह कॉर्पोरेट जीवन की चकाचौंध के बजाए अपने
देश की कहानियों और सुंदरता को दुनिया के सामने लाना चाहती है।
उसने कॉर्पोरेट नौकरी का प्रस्ताव ठुकरा दिया और अल्माटी लौट
आई। उसका नया लक्ष्य था—टूर गाइड बनना।
शुरुआत में काफी संघर्ष था। गाइड बनने के लिए उसे स्थानीय
इतिहास, भूगोल और भाषाओं की
गहरी समझ पर घंटों काम करना पड़ा। पर्यटक उसे शुरुआत में गंभीरता से नहीं लेते थे
और आय भी बहुत कम थी। लेकिन डियाना में एक अनूठा जुनून था।
उसने खुद को केवल स्थानों का विवरण देने तक सीमित नहीं रखा। वह
पर्यटकों को अल्माटी के सेबों की कहानी सुनाती,
उन्हें अपने माता-पिता के प्रेम और उनके चारीन कैन्यन में हुए विवाह
की दास्तान बताती। उसकी कहानियों में एक गहरा भावनात्मक जुड़ाव था। जल्द ही,
'डियाना: द स्टोरीटेलिंग गाइड' के रूप में
उसकी ख्याति फैल गई। वह एक सफल, आत्मविश्वास से भरी और
स्वतंत्र महिला बन चुकी थी।
इस बीच, उसे दो बार विवाह के
प्रस्ताव भी मिले, लेकिन डियाना ने उन्हें अस्वीकार कर दिया।
वह जानती थी कि वह तभी शादी करेगी जब उसे ऐसा साथी मिलेगा जो उसके जुनून और उसकी
स्वतंत्रता का सम्मान करेगा, न कि केवल उसके शांत स्वभाव से
आकर्षित होगा।
भाग - ४
पतझड़ की एक सुबह,
डियाना अपने एक टूर ग्रुप को बिग अल्माटी लेक के किनारे गाइड कर रही
थी। उस ग्रुप में इस्तांबुल (तुर्की) से आया एक पर्यटक था—आर्सेन, जो खुद भी इतिहास का बेहद शौकीन था।
आर्सेन शांत नहीं था;
वह उत्साह से भरा हुआ था और लगातार सवाल पूछता रहता था। वह केवल
दृश्यों को ही नहीं, बल्कि डियाना की कहानियों को भी बहुत
ध्यान से सुनता था।
जब डियाना ने झील के रंग बदलने की ख़ासियत बताई, तो आर्सेन ने पूछा, "तुम्हारे देश में सब कुछ इतना अद्भुत क्यों है? सेब
से लेकर कैन्यन तक, और यहाँ के लोगों के दिल भी!"
डियाना मुस्कुराई,
"शायद इसीलिए कि यहाँ की सुंदरता को संघर्ष और प्रेम ने आकार
दिया है।"
आर्सेन ने जवाब दिया,
"मुझे लगता है कि तुममें भी वही जादू है।"
उनके विचार जल्द ही मिलने लगे। आर्सेन केवल एक साधारण पर्यटक
नहीं था; वह डियाना के साहसी
और मुक्त स्वभाव का सच्चा प्रशंसक था। येरकीन ने डियाना को उसके शांत स्वभाव के
कारण चाहा था, लेकिन आर्सेन ने डियाना को उसकी मज़बूती,
उसके जुनून और उसकी 'स्टोरीटेलिंग' की कला के लिए प्यार किया।
कुछ मुलाकातों के बाद,
आर्सेन ने डियाना को बताया कि वह एक ट्रैवल ब्लॉगर है और उसने
कज़ाकिस्तान की यात्रा इसलिए की थी क्योंकि वह यहाँ की लोककथाओं और इतिहास पर एक
लेख लिखना चाहता था।
"तुम्हारी कहानियों ने मुझे इतना प्रेरित
किया है कि मैं अब केवल अल्माटी की नहीं, बल्कि तुम्हारी
कहानी भी दुनिया को बताना चाहता हूँ," आर्सेन ने एक रात
फोन पर कहा।
डियाना का दिल तेज़ी से धड़का। यह पहली बार था जब उसने किसी की
बातों में सच्ची ईमानदारी और गहरा सम्मान महसूस किया था।
"मुझे यह जगह बहुत पसंद है," आर्सेन ने आगे कहा, "खासकर वह 'मिनी ग्रैंड कैन्यन' जिसके बारे में तुमने बताया
था—चारीन कैन्यन। वह वाकई जादुई लगता है।"
"वह सचमुच जादुई है," डियाना ने फुसफुसाते हुए कहा।
"मैं चाहता हूँ कि हम दोनों वहाँ साथ जाएँ।
केवल गाइड और पर्यटक के रूप में नहीं, बल्कि दो साथियों के
रूप में। क्या तुम मुझे एक और कहानी सुनाओगी? तुम्हारी अपनी
कहानी?"
डियाना की आँखों में पहली बार खुशी के आँसू थे—खारे पानी के
नहीं, बल्कि प्रेम और
आत्मविश्वास से भरे।
"हाँ, आर्सेन! ज़रूर
सुनाऊँगी," उसने उत्तर दिया।
इस बार कोई पत्र नहीं था,
कोई झिझक नहीं थी और कोई इंतज़ार नहीं था। डियाना को अहसास हुआ कि
उसकी जीवन-यात्रा उसे उसी मुकाम पर ले आई है जहाँ कभी उसके माता-पिता खड़े थे—एक
अलग दुनिया, जहाँ उसने अपने लिए एक ऐसा साथी खोज लिया था जो
उसके जीवन की पूरी कहानी को प्यार करता था, न कि केवल उसके
किसी एक हिस्से को।
इन्द्रप्रस्थ भारती, दिल्ली में प्रकाशित कहानी
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