शोध-ऋतु के दार्जिलिंग विशेषांक का विमोचन
भारतीय ज्ञान परंपरा, शिक्षा, साहित्य एवं अनुसंधान पर केंद्रित विशेषांक में देशभर के 300 शोधार्थियों एवं प्राध्यापकों की सहभागिता
दार्जिलिंग साहित्य महोत्सव-2026 के अंतर्गत आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में ‘शोध-ऋतु’ अंतरराष्ट्रीय शोध पत्रिका के दार्जिलिंग विशेषांक का गरिमापूर्ण विमोचन किया गया। विशेषांक का विषय ‘भारतीय ज्ञान परंपरा : शिक्षा, साहित्य और अनुसंधान’ रहा। इसमें देश के विभिन्न प्रांतों से लगभग 300 शोधार्थियों, प्राध्यापकों एवं विद्वानों ने अपने शोध आलेख भेजे।
विमोचन समारोह में विंग्स पब्लिकेशन हाउस की एडिटर-इन-चीफ सुलेखा सरकार ने स्वागत भाषण दिया। मुख्य अतिथि नेपाली साहित्य सम्मेलन, दार्जिलिंग के महासचिव महेंद्र प्रधान रहे। विशिष्ट अतिथियों में दार्जिलिंग हिल्स यूनिवर्सिटी के परीक्षा नियंत्रक डॉ. देबाशीष दत्ता, एसएसएम जलपाईगुड़ी के अतिरिक्त जिला परियोजना अधिकारी राजीव चक्रवर्ती तथा दार्जिलिंग हिल्स यूनिवर्सिटी की रजिस्ट्रार सुजाता रानी राय उपस्थित रहीं। इस अवसर पर आचार्य नंददुलारे वाजपेयी फाउंडेशन, पलवल की अध्यक्ष सुमन रानी एवं सचिव संजय कुमार भी उपस्थित रहे।
विशेषांक में भारतीय ज्ञान परंपरा के शिक्षा, साहित्य, संस्कृति एवं अनुसंधान से जुड़े विभिन्न आयामों पर शोध आलेख प्रकाशित किए गए हैं। हिंदी सेवा के उद्देश्य से ‘शोध-ऋतु’ के संपादक डॉ. सुनील जाधव ने विशेषांक के लिए निःशुल्क संपादकीय कार्य किया। विशेषांक का संपादन सुमन रानी एवं संजय कुमार ने किया।
संगोष्ठी के एक महत्वपूर्ण सत्र की अध्यक्षता डॉ. सुनील जाधव ने की। सत्र में भारतीय ज्ञान परंपरा के समकालीन संदर्भों तथा शिक्षा, साहित्य और अनुसंधान से जुड़े विषयों पर विद्वानों ने शोध-पत्र प्रस्तुत किए।
विशेषांक का विमोचन दार्जिलिंग में आयोजित इस अकादमिक आयोजन का प्रमुख आकर्षण रहा। उपस्थित विद्वानों ने इसे हिंदी में शोध एवं भारतीय ज्ञान परंपरा के अकादमिक विमर्श को आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया।

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